पाठशाला : ज्ञानाराधना के आठ दोष – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज

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जब आप स्वाध्याय करते हैं तो सावधानी, विवेक रखना आवश्यक है नहीं तो पाप का बन्ध हो जाता है। यशस्तिलक चम्पूगत-उपास्काध्ययन में वर्णन आया है कि स्वाध्याय करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए।

तो आओ जानते हैं उन सावधानियों को

1. स्वाध्याय के समय का ध्यान न रखना पहला दोष है।
2. शुद्ध उच्चारण न करना, अक्षरादिक को छोड़ जाना दूसरा दोष है।
3. शास्त्र का अर्थ ठीक करना तीसरा दोष है।
4. न उच्चारण ठीक करना और न अर्थ ठीक करना चौथा दोष है।
5. जिनसे पढ़ा है या विचारा है उनका नाम छिपाना पांचवा दोष हैं।
6. जो पढ़ा है उसको धारण न करना छठा दोष है।
7. विनय पूर्वक अध्ययन न करना सातवां दोष है।
8. गुरु का आदर न करना आठवाँ दोष हैं।

अनंत सागर
पाठशाला
उनचासवां भाग
3 अप्रेल 2021, शनिवार, भीलूड़ा (राजस्थान)

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