वैश्विक परिवर्तन के समय जन्मोत्सव कैसे मनाया जाए – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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बच्चों आप कैसे हो? हम सब जानते हैं कि सबसे अधिक खुशी तुम्हें अपने जन्म दिन मनाते वक्त होती है। किंतु लाॅकङाउन के बाद क्या तुम जानते हो तुम्हें इस दिन को अलग तरीके से मनाना होगा ? क्योंकि पुराने तरीकों से अब यह खुशी तुम्हारे दुख का कारण बन सकती है। बच्चों तुम अपना जन्म दिन होटल में मनातें हो या घर में लाइट लगाकर और भी कई रंग बिरंगी वस्तुओं से घर को सजाते हो। यह सब करने से तुम्हें कुछ देर की खुशी तो अवश्य होती है पर तूम्हें क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं? यह तुम्हें पता होना चाहिए।क्योंकि आगे जाकर यही कुछ देर की खुशी बहुत सारा दुख दे जाती है। अधिकतर जिन वस्तुओं का तुम उपयोग करते हो वह सब चाइनीस होती है। चाहे वह लाइट, कलर, पेन, पेंसिल या और भी सजावटी सामान। चाइनीस लाइट तुम्हारी आंखों को खराब करती है क्योंकि वह अधिक कलर फूल और तीव्र होती है। वहां के बने कलर तुम्हारी स्किन को खराब करते हैं और तुम्हे कैंसर जैसी भयानक बिमारी तक दे सकता है। बाज़ार में बने केक, मिठाई इत्यादि पदार्थों में अगर शुचिता का ध्यान न रखा गया होगा तो वह संक्रमण का कारण बन सकता  है।एक खबर में रिसर्च के साथ एक पेज प्रकाशित किया था जिसमें बाजार में गेहूं का जो आटा मिलता है वह भी कैंसर का कारण होता है। तुम्हें पता है बच्चों खाने की वस्तुओं को आकर्षक और सुंदर बनाने के लिए जिन कलर, कैमिकल का उपयोग किया जाता है वह सब शरीर को बीमारी के साथ स्मरण शक्ति को कमजोर कर देता है। बच्चों जब तुम केक काटकर मोमबत्ती बुझाते हो तो फूंक के साथ तुम्हारा थूक भी उस केक में जाता है। आज कोरोना के चलते हम अगर ऐसा करेंगे तो क्या आपने सोचा है हम जन्मदिवस की रिटर्न गिफ्ट में बीमारी फैलाने का माध्यम बन सकते हैं। क्यों कि अब तक तो तुमने सुना ही होगा की कोरोना महामारी कैसे फैल रही है ? अगर तुम अपने आप को कैसे इस बीमारी से बचा पा रहे हो यह तो तुम खुद अच्छे से समझ रहे हो।
बच्चों, तुम्हारे मन में आ रहा होगा की कब लॉकडाउन समाप्त हो कब दोस्तों के साथ मिलकर पार्टी करें। अब तुम्हें यह सब सोचना छोड़ना ही होगा। नहीं तो तुम अपने आपको, अपने परिवार और दोस्तों को इस बीमारी से नहीं बचा पाओगे। तुम बताओं अभी भी तुम घर में रहकर अपना जीवन जी रहे हो, सब कुछ हो रहा है । घर में सिमट कर ही सही किंतु अभी भी तुम अपनी खुशियाँ मना रहे हो। पढ़ाई-मस्ती सब कर रहे हो बस अंतर यह है की परिवार के साथ सीमित रहकर। एक नए द्रष्टिकोण से जीवन को देखना होगा। इस लम्बे समय में जब परिवार के सारे सदस्य चौबीसों घंटे साथ हैं, तो क्या परिवार में एक दूसरे के प्रति प्रेम और आपसी सहयोग में बढोतरी हुई है और माहौल और सुखद हुआ है । जबकि इससे पहले इस ओर तो हमने ध्यान ही नहीं दिया था। एक दूसरे को तुम दोस्त की तरह समझने लगे हो तो फिर क्यों ऐसी जिंदगी में वापस जाना चाहते हो जो तुम्हारे और तुम्हारे अपनों के लिए खुशी के साथ दुख और बीमारी लेकर आए।
बच्चों यह सब बातें तुम्हें अजीब लग रही होगी पर यही आज सही है। बच्चों तुम अपना जन्म दिन कैसे मनाओ जिससे तुम्हारे साथ और लोगों को भी खुशी मिले, तुम्हें उनका आशीष मिले और तुम्हारी खुशी दुगनी हो जाए। तो, मैं तुम्हें बताऊंगा कैसे जन्मदिन मनाना चाहिए। पहले घर में बड़ों से आशीर्वाद लेकर अपने प्रभु का स्मरण और उसकी पूजा करना चाहिए और प्रार्थना करना चाहिए की सब के मन में प्रकृति के संरक्षण का, देश प्रेम का भाव जाग्रत हो।प्रभु के समक्ष उतने दीपक लगाओ जितने वर्ष के आप हो गए हो। दीपक लगाकर अपनी उन गलतियों का स्मरण करें जिसके कारण तुम्हारे द्वारा दूसरों को दुख पहुँचा हो और उनसे क्षमा मांगें तथा संकल्प करें कि आगे से इस प्रकार की गलती नहीं करूँगा। यह करने में शायद तुम्हें हिचक होगी किंतु करने के बाद एक विशिष्ट प्रसन्नता का अनुभव भी होगा। हर जन्मदिन पर एक पौधा लगाओ ओर उसे पानी, खाद आदि देने का संकल्प करो। ऐसा प्रतिवर्ष करके देखो, जब तुम प्रकृति का संरक्षण करोगे तो प्रकृति भी तुम्हारी रक्षा करेगी। अनाथ या अपंग बच्चों के लिए सहायता भेज सकते हैं। बच्चों इस कोरोना महामारी के बीच भी बच्चों में अपना जन्मदिन मनाया होगा। घर पर बना केक, परिवार के साथ मस्ती, बड़ों और गुरूओं का आशीर्वाद और भी बहुत कुछ तुम्हें मिला होगा। बच्चों असली खुशी तो तब होती है जब हमारी खुशी में हजारों लोग खुश हो जाए और प्रकृति का संरक्षण हो। और तुम अकेले नहीं हो पाश्चात्य संस्कृति का परित्याग सिर्फ तुम्हें ही नहीं वरन् अब सम्पूर्ण विश्व को करना होगा। बच्चों अब तुम ही सोचो की तुम्हें किस रूप में अपना जन्मदिन मनाना है जिसमें तुम्हारी खुशी से और हजारों भी खुश हो और तुम्हारी खुशी तुम्हारे या अन्य लोगों के दुख का कारण ना बने।

अनंत सागर

पाठशाला (तीसरा भाग)

16 मई 2020, उदयपुर

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