शांतिधारा के कुछ महत्वपूर्ण शब्द और उनका अर्थ – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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बच्चों… कैसे हो आप लोग ? आज की पाठशाला में मैं आपको कुछ खास शब्दों का अर्थ बताउंगा। यह शब्द भगवान की शांतिधारा में आते हैं और शांतिधारा चूंकि बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए आप जब शांतिधारा बोल रहे हो तो, उन शब्दों का अर्थ भी आना बहुत जरूरी है।
जब अभिषेक के बाद शांतिधारा करते हैं तो उसमें ग्राम, नगर, खेट, खर्वट, मटम्ब, पतन, द्रोणामुख, संवाह आदि -आदि शब्द आते हैं। हमें यह पता होना चाहिए कि इन अर्थ क्या है। आदिपुराण में इनका सब अर्थ विस्तार से बताया है। मैं आपको संक्षेप में उनका अर्थ बता रहा हूं।
ऽ ग्राम-जिसमें बाड़ से घिरे हुए घर हो, और अधिकतर किसान लोग रहते हों। जहां बगीचा और तालाब आदि हों, उसे ग्राम कहते हैं।
ऽ नगर- जो परिखा, गोपुर, अटारी, कोट आदि से सुशोभित हो। जिसमें अनेक भवन बने हुए हों। जहां बगीचे और तालाब हों। जो उत्तम रीति से अच्छे स्थान पर बसा हुआ हो। जिसमें पानी का प्रवाह ईशान दिशा की ओर हो और जो प्रधान पुरुषों के रहने के योग्य हो वह प्रशंसनीय पुर अथवा नगर कहलाता है।
खेट : जो नगर नदी और पर्वत से घिरा हुआ हो उसे खेट कहते हैं।
खर्वट : जो नगर मात्र पर्वतों से घिरा हो उसे खर्वट कहते हैं।
मटम्ब : जो स्थान पांच सौ गांवों से घिरा हो उसे मटम्ब कहते हैं।
पत्तन : जो समुद्र के किनारे हो तथा जहां पर लोग नांव से आते जाते हो उसे पत्तन कहते हैं।
द्रोणमुख : जो किसी नदी के किनारे बसा हो उसे द्रोणमुख कहते हैं।
संवाह : जहां मस्तकपर्यंत ऊंचे-ऊंचे धान के ढेर लगे हों वह संवाह कहलाता है।
ते बच्चों….अब से जब भी शांतिधारा बोलो तो इन शब्दों का अर्थ याद रखना।

अनंत सागर
पाठशाला
(पच्चीसवां भाग)
17 अक्टूबर 2020, शनिवार, लोहारिया

अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
(शिष्य : आचार्य श्री अनुभव सागर जी)

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