श्रावक : इन सात स्थितियों में छोड़ देना चाहिए भोजन– अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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in saath isthitiyon me chhod dena chahiye bhojan

श्रावक जब भोजन करने बैठता है तो उसे सात स्थितियों में भोजन छोड़ देना चाहिए । इसे अन्तराय कहते हैं।
सात प्रकार की अन्तराय इस प्रकार है –
दर्शनजन्य – भोजन करते समय गीला चमड़ा,हड्डी,शराब,मांस,बहता खून,पीव, मल-मूत्र आदि दिख जाने पर ।
स्पर्शनजन्य – भोजन करते समय रजस्वला महिला,सूखा चमड़ा,सूखी हड्डी,कुत्ता,बिल्ली आदि का स्पर्श हो जाने पर ।
श्रवण जन्य – भोजन के समय कर्कश कठोर, हृदय विदारक-आर्तस्वर और आतंक उत्पादक स्वरों को सुनने से भोजन का त्याग कर देना चाहिए ।
स्वादजन्य – त्यागी हुई वस्तु का भूलवश सेवन कर लेने से अन्तराय मानना चाहिए ।
घ्राणजन्य – भोजन के समय शराब आदि दुर्गन्धित पदार्थों की गंध आने से भोजन छोड़ देना चाहिए ।
मानसिक संकल्प जन्य – भोजन के समय ग्लानि जनक विचार आने पर भोजन का परित्याग कर देना चाहिए ।
त्रस विघात – भोजन में मृत त्रस जीवों के अथवा जिनको अलग कर पाना शक्य नहीं हैं, ऐसे जीवित त्रस जीवों के मिल जाने और वह भोजन असेवनीय है ।

अनंत सागर
श्रावक (पचासवां भाग)
16 अप्रैल,बुधवार 2021
भीलूड़ा (राज.)

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