श्रावक : जय जयकार से ही पुण्य का संचय – अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी

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निर्मल भावों से जिनेन्द्र भगवान के नाम का उच्चारण और जय जयकार करने मात्र से ही सम्पूर्ण कर्मो का नाश हो जाता है। पद्मपुराण के पर्व 5 में जिनेन्द्र भगवान की भक्ति में मगन होकर मात्र जय जयकार करने से ही एक मानव स्वर्ग में देव हो गया।

तो चलो उसकी कथा सुनते हैं-

पोदनपुर में हित नाम का मनुष्य और उसकी पत्नी माधवी रहते थे। उन दोनों का प्रीत नाम का पुत्र था। एक दिन वहाँ का राजा उदयाचल राज जिन मंदिर में पूजना करने आया। यह पूजा बड़ी धूमधाम के साथ की जा रही थी। लोग मन्दिर में बैठकर जय जयकार कर रहे थे। यह आवाज मंदिर के सामने वाले मकान में प्रीत को सुनाई दी। वह भी घर के आंगन में जय जयकार करने लगा और मयूर की तरह नाचने लगा। इससे प्रीत को पूण्य का बन्ध हुआ और वह मरकर स्वर्ग में यक्ष नाम का देव हुआ।

अनंतसागर
श्रावक
बयालीसवां भाग
17 फरवरी 2021, बुधवार, बांसवाड़ा

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