भाग अडतालीस : जिनेंद्र भगवान की वाणी में विश्वास न होने से ही मिलती है विफलता-आचार्य शांतिसागर महाराज

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आचार्य शांतिसागर महाराज कहते थे कि धर्म का रक्षण करो तो वह भी आपकी रक्षा करेगा। इस धर्म का मूल दया है। इस धर्म से न केवल मोक्ष बल्कि अर्थ का भी लाभ होता है। आज प्रजा परेशान है, धन-धान्य का कष्ट है, संकटों की कोई सीमा नहीं है। इसका एक ही कारण है लोग धर्म छोड़ रहे हैं, दया छोड़ रहे हैं। यदि लोग दयामय धर्म का रक्षण करेंगे तो धर्म भी उनके सारे संकटों को दूर करेगा। इसी तरह से हर व्यक्ति को जिनेंद्र की वाणी पर श्रद्धा रखनी चाहिए। वह दीपक के समान मोह की अंधेरी रात में राह दिखाती है। जिनवाणी का मंत्र पाकर एक श्वान के जीव ने भी देव पद पाया था। जिनेंद्र भगवान की वाणी में अपार शक्ति है। उसमें हमारा विश्वास नहीं है, इसलिए हम विफल होते हैं। भगवान की वाणी औषधि के समान है और पापों का त्याग करना उस औषधि को ग्रहण करने के लिए पथ्य के समान है। लोग धर्म की बातें जानते हैं लेकिन उनमें श्रद्धा का अभाव है। इसी वजह से उनका कल्याण नहीं होता।

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