भाग सत्ताईस : जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक पूरे विधान से करने पर हर स्थान की हो जाती है शुद्धि – आचार्य श्री शांतिसागर महाराज – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

label_importantशांति कथा

आचार्य श्री शांतिसागर महाराज ने वास्तुशुद्धि करने का कारण बताते हुए कहा था कि घर, दुकान आदि बनाते समय जो हिंसा होती है , वृक्षादि का घात होता है, वह निंदनीय है लेकिन उस स्थान पर पूरे विधि-विधान के साथ जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक करने से वह स्थान शुद्ध हो जाता है और उत्तम पात्र (मुनि,आर्यिका) को आहार देने योग्य हो जाता है। महाराज ने कहा था कि कुएं की शुद्धि होने बाद ही उस कुएं का पानी जिनेन्द्र भगवान के अभिषेक करने योग्य होता है। महाराज ने कहा था कि कुएं आदि बनाते समय जो हिंसा होती है,जीवों का घात होता है, उसके दोष को दूर करने के लिए विधान आदि करना आवश्यक है।

Related Posts

Menu