भाग छः : जीव मात्र के प्रति दया भाव रखते थे सातगौड़ा – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

label_importantशांति कथा

आज मैं आपको सातगौड़ा की कुछ ऐसी बातों से परिचित करवाऊंगा, जिससे सातगौड़ा की जीवन शैली का अहसास आप सभी को होगा। सातगौड़ा बचपन से ही दूसरों के प्रति दया भाव रखते थे। सातगौड़ा नौकरों से काम करवाने की बजाए खुद ही चावल के चार मन के बोरों को सहज ही उठा लेते थे। और तो और कुएं से रहट द्वारा बैल पानी खींचते थे तो सातगौड़ा बैलों को अलग कर खुद ही बैलों की जगह लगकर पानी खींचने लग जाते थे। एक बार तो कुछ ऐसा हुआ कि सातगौड़ा खेत में गए तो वहां उन्होंने देखा कि उनके खेत में काम करने वाला नौकर ज्वार का एक कट्टा(बोरी) अपने घर ले जा रहा था। सातगौड़ा और नौकर ने एक-दूसरे को देख लिया लेकिन सातगौड़ा ने नौकर से कुछ कहने की बजाय नौकर की ओर से अपनी नजर हटा ली और दूसरा काम करने लग गए। नौकर घबरा कर सातगौड़ा के घर गया और वहां सातगौड़ा के भाई को सारी घटना बता दी। सातगौड़ा ने कभी उस नौकर के बारे और उस घटना के बारे में कोई चर्चा नहीं की। इसी से आप समझ सकते हैं कि सातगौड़ा का गरीबों के प्रति दया का भाव कितना होगा और उनकी रोटी की कितनी चिंता होगी। एक बार एक सांप मेंढक का शिकार करने की कोशिश कर रहा है, यह सातगौड़ा ने देख लिया। मेंढक को बचाने के चक्कर में हाथ में पकड़े लोटे को ही सातगौड़ा ने पत्थर पर जोर से पटक दिया, जिसे सांप चला गया और मेंढक की जान बच गई। ऐसी और भी घटनाएं महाराज के जीवन से संबधित हैं । आप ध्यान रखना सातगौड़ा हमारे आचार्य श्री शांतिसागर महाराज ही हैं।

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