कर्म

label_importantकविता

हर राह पर साथ यही है,
कभी गम कभी खुशी दे जाते हैं
वर्तमान, भूत, भविष्य इन्हीं पर निर्भर हैं
पुण्य-पाप इसी के कहने पर है,
भावों पर आधारित है इनका आना-जाना
न्याय-अन्याय नहीं होने देते किसी का
हर क्षेत्र में दखल किसी को नहीं छोड़ते
जो समझ गए बेड़ा पार, नहीं भटकते रहते हैं

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