केशलोचन से बढ़ जाती है आत्मा की सुंदरता

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-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का हुआ हुमड़ भवन में केशलोचन, श्रावकों की आंखों में आए आंसू

उदयपुर। अशोक नगर स्थित श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का केशलोचन शुक्रवार को हुआ। मुनि श्री इसके लिए हुमड़ भवन पहुंचे और वहां विराजमान आचार्य श्री चन्द्र सागर से अपना केशलोचन करवाया। केशलोचन के समय वहां उपस्थित श्रावकों की आखों में आंसू उस समय आ गए, जब मुनि श्री के मूंछ के बाल हाथों से निकाले जा रहे थे। दरअसल केशलोचन जैन संत की चर्या में एक आवश्यक कर्तव्य है, जिसमें जैन संत के सिर, दाढ़ी और मूंछ के बाल हाथों से खास तरह से उखाड़े जाते हैं। इस अवसर पर आचार्य श्री ने कहा कि जैन संत के लिए अधिक से अधिक चार माह में एक बार और कम से कम 2 महीने में एक बार केशलोचन करना आवश्यक है। केशलोचन से साधु में सुंदरता का मोह खत्म हो जाता है और आत्मा की सुंदरता बढ़ जाती है। इससे संयम का पालन भी होता है। उन्होंने कहा कि बालों को हाथों से उखाड़कर जैन संत इस बात को साबित करते हैं कि यह धर्म कहने का नहीं बल्कि सहने का धर्म है। इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि केशलोचन शरीर को कष्ट देना नहीं है, बल्कि यह तो उत्कृष्ट साधना का शक्ति परीक्षण है। केशलोचन करते समय बाल हाथ ना फिसल जाएं, इसके लिए कंडे की राख का प्रयोग किया जाता है। खास बात यह भी है कि जिस दिन केशलोचन होता है, उस दिन जैन मुनि अन्न और जल भी ग्रहण नहीं करते।

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