क्षमा के अभाव में व्यक्ति क्रोध को स्थान देता है। – मुनि पूज्य सागर महाराज

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पर्युषण पर्व विशेष -पहला दिन – उत्तम क्षमा धर्म

पर्व उल्लास का प्रतीक होते हैँ। पर्व हैं तो संस्कृति है और संस्कृति है तो उमंग है, उत्साह है। इसी कड़ी में दशलक्षण पर्व का प्रारंभ आज से होने जा रहा है। दशलक्षण पर सभी वर्ग के श्रावक अपनी शक्ति के अनुसार त्याग, तप और संयम की आराधना के साथ प्रभु भक्ति करेंगे। दशलक्षण पर्व का आगाज उस समय हुआ था जब मानव दुःख से सुख की ओर कदम बढ़ा रहा था। उसी ख़ुशी में दस दिन तक भक्ति आराधना का क्रम प्रारंभ हुआ। पहला दिन उत्तम क्षमा का दिन है। क्षमा से व्यक्ति को इस भव के साथ अगले भव में सुख मिलता है। जीवन के हर कार्य के साथ क्षमा का होना आवश्यक है तभी वह अपने आप को संकट से बचा सकता है। जीवन में सुख, शांति और समृद्धि धारण कर सकता है। परिवार, आफिस और दोस्तों के विवादों से बचने के लिए उनके हर कार्य के प्रति क्षमा का भाव धारण करना, जैसे परिवार में किसी ने आप को यह कहा दिया कि ये किसी काम का नहीं तो उस समय क्षमा धारण कर यह सोचना चाहिए कि ये पाप का उदय है, तो आप विवादों से बच जायेंगे और परिवार में शांति बनी रहेगी। इस तरह आफिस और दोस्तों के बारे में सोच लेंगे तो झगड़े और क्रोध से बच जाएंगे। वास्तव में क्षमा करने से अधिक लाभ क्षमा को धारण करने से, परिणाम और भाव विशुद्ध होते है। क्षमा के अभाव में व्यक्ति क्रोध को जगह देता है और जीवन को संकट में डाल देता है। यह पर्व आत्मशुद्धि का भी कहा जा सकता है। जब आपकी आत्मा पवित्र और शुद्ध होगी तो आपका मन भी प्रसन्न रहेगा।

– मुनि पूज्य सागर महाराज

उत्तम क्षमा धर्म के जाप

ऊँ ह्रीं उत्तम क्षमाधर्मांगाय नम:
( जैसे अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर ने बताया )

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