आलेख : महात्मा गांधी अहिंसा के पुजारी – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी

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दे दी हमें आजादी, बिना खड्ग बिना ढाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।

आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि है। हम में से बहुत सारे लोगो ने गांधी को देखा नहीं फिर भी उनके लिए हमारे मन में सम्मान है। गांधी जी भविष्यदृष्टा और युगदृष्टा थे, लेकिन आज हमारे बीच नहीं हैं। हालांकि उनके आदर्श और सिद्धांत आज भी देश की रीति-नीति का हिस्सा हैं और देशवासियों का पथ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका नाम और काम दोनों अमर है और हमेशा रहेगा।

मनुष्य पर किसी ना किसी धर्म या व्यक्ति का प्रभाव अवश्य रहता है। गांधी जी पर भी जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा और अहिंसा का उपदेश देने वाले महावीर भगवान का प्रभाव था, इसीलिए गांधी जी अहिंसा पर जोर दिया करते थे। गांधी जी ने अहिंसा से ही देश को आजाद करवाया। वे कहते थे जीवन मे भी अहिंसा से सुख, शांति और समृद्धि आ सकती है। अहिंसा धर्म के प्रभाव के कारण ही उनके सत्याग्रह, असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन बेहद प्रभावशाली रहे। अंग्रजों को गांधीजी के उच्चादर्शों ,अहिंसा एवं सत्य के सामने झुकना पड़ा और देश आजाद हुआ।

गांधी जी ने हमेशा स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर जोर दिया। सूत कातने, सब धर्मों को आदर से देखने और सत्य, अहिंसा को जीवन में अपनाने की शिक्षा दी। गांधीजी ने विश्व को शांति का संदेश दिया। गांधीजी ने प्रेम और भाईचारे की भावना से भारत ने ही पूरे विश्व को प्रभावित किया है। वे देश में रामराज्य स्थापित करना चाहते थे। भारत की आजादी के पश्चात देश दो टुकड़ों में विभाजित हुआ तो उन्हें बहुत दु:ख पहुंचा।

फिर वह दिन आ गया जब नाथूराम गोड़से नामक व्यक्ति की गोली से 30 जनवरी 1948 को गांधीजी की जीवनलीला समाप्त हो गई। यह एक ऐसा आघात था, जिसने पूरे देश की भावनाओं को छलनी कर दिया था। आज शहीद दिवस पर उनका जीवन हमें यही प्रेरणा देता है कि सत्य, अहिंसा और सद्भाव ही देश को आगे बढ़ा सकते हैं।

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