मंदिर में क्या करें, क्या न करें – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज

label_importantपाठशाला

बच्चों आप सब कैसे हैं! ठीक हैं ना…? आओ चलें, आज की पाठशाला में इस बात पर चर्चा करते हैं कि मंदिर में कौन से कार्य नहीं करने चाहिए। बच्चों, इस विषय पर चर्चा करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि मंदिर पवित्र स्थान है। वहां तीर्थंकर की प्रतिमा विराजमान होती हैं, कहीं अज्ञानता में उनका अविनय न हो जाएँ।

बच्चों आप सब एक उदारण से समझो कि मंदिर के नियमों का पालन क्यों जरूरी है। आप सब स्कूल जाते हैं तो आपको वहां के नियमों का पालन करना पड़ता है। तभी आप सबको स्कूल में पढ़ने और उपस्थित होने का परिणाम मिलता है। बस, कुछ ऐसा ही मंदिर के साथ है। मंदिर के नियमों का पालन करने वालों को ही मंदिर जाने का फल और पुण्य मिलता है। तो चलो पढ़ते हैं कि मंदिर में क्या करना या फिर नहीं करना चाहिए।

• हाथ-पैर धोकर मंदिर में प्रवेश करना चाहिए।
• कषाय रहित प्रवेश करना चाहिए और मन्दिर में कषाय नहीं करना चाहिए।
• मंदिर में मौजे, ऊनी कपड़े, चमड़े से बनी वस्तु और फैशन वाले कपड़े पहन कर नहीं जाना चाहिए।
• मंदिर में खाद्य पदार्थ लेकर नहीं जाना चाहिए।
• मंदिर में किसी भी व्यक्ति के सामने खड़े होकर दर्शन नहीं करना चाहिए।
• मंदिर में घर-परिवार, समाज और अन्य प्रकार की बातें नही करनी चाहिए।
• जब तक मंदिर में रहें मौन होकर भक्ति, पूजन, अभिषेक करना चाहिए।
• पूजन आदि का उच्चारण इतनी ही आवाज में करें कि किसी दूसरे को परेशानी ना हो।
• दीवार का सहारा और गद्दी आदि पर नहीं बैठना चाहिए।
• मान-सम्मान नहीं करवाना चाहिए और न ही करना चाहिए।

तो आप सब संकल्प करो कि इन बातों का ध्यान रखेंगे। मंदिर परिसर में यह सब नहीं करेंगे। साथ ही इन बातों को दूसरों को भी बताएंगे।

अनंत सागर
पाठशाला
उनचालीसवां भाग
23 जनवरी 2021, शनिवार, बांसवाड़ा

Related Posts

Menu