कहानी:-‘विश्वास का भाव’ – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

label_importantकहानी

एक व्यक्ति बहुत परेशान था। उसके दोस्त ने उसे सलाह दी कि कृष्ण भगवान की पूजा शुरू कर दो। उसने कृष्ण भगवान की मूर्ति घर लाकर उसकी पूजा करना शुरू कर दी। कई साल बीत गए लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। एक दूसरे मित्र ने कहा कि तू काली मां की पूजा कर, जरूर तुम्हारे दुख दूर होंगे। अगले ही दिन वो एक काली मां की मूर्ति घर ले आया। उसने कृष्ण भगवान की मूर्ति को मंदिर के ऊपर बनी एक टांड पर रख दी और काली मां की मूर्ति मंदिर में रखकर पूजा शुरू कर दी। फिर उसके दिमाग में ख्याल आया कि जो अगरबत्ती, धूपबत्ती काली जी को जलाऊंगा उसे तो श्रीकृष्णजी भी सूंघ लेंगे। ऐसा करता हूं कि श्रीकृष्ण के मुंह पर कपड़ा बांध देता हूं। जैसे ही वो ऊपर चढ़कर श्रीकृष्ण के मुंह पर कपड़ा बांधने लगा, कृष्ण भगवान ने उसका हाथ पकड़ लिया। वो हैरान रह गया और भगवान से पूछा, इतने वर्षों से पूजा कर रहा था तब नहीं आए। अब कैसे प्रकट हो गए? भगवान श्रीकृष्ण ने समझाते हुए कहा, आज तक तू एक मूर्ति समझकर मेरी पूजा करता था किन्तु आज जब तुम्हें एहसास हुआ कि कृष्ण सांस ले रहा है, तो बस मैं आ गया।
सीख -विश्वास ही प्रभु तक पहुंचने का मार्ग है।

अनंत सागर
कहानी
(सत्ताईसवां भाग)
1 नवम्बर, 2020, रविवार, लोहारिया
अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
(शिष्य : आचार्य श्री अनुभव सागर जी)

Related Posts

Menu