शनि अमावस्या पर हुआ मुनि सुव्रतनाथ का पंचामृत अभिषेक

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भीलूड़ा । शनि अमावस्या पर श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज के सानिध्य में भगवान मुनिसुव्रतनाथ का पंचामृत अभिषेक, मुनिसुव्रतनाथ विधान एवं क्षेत्रपाल की आराधना के साथ हवन किया गया।

इस अवसर पर सब से पहले भगवान का जल,दूध,घी,दही,केसर आदि से पंचामृत अभिषेक और महाशान्तिधारा किए गए। महाशान्तिधारा करने का सौभाग्य जयंतीलाल जैन,अशोक जैन को प्राप्त हुआ । अभिषेक के बाद भगवान के गुणों का गुणगान करते हुए मंडप पर 108 अर्घ्य चढ़ाने का पुण्यार्जन सौधर्म इन्द्र बने धर्मेश धनपाल जैन को प्राप्त हुआ ।
क्षेत्रपाल का हल्दी, चन्दन, लाल चन्दन, सफेद चंदन, सिंदूर, गुलाल से अभिषेक के साथ वस्त्र समर्पित किए । कार्यक्रम में 96 अर्घ्य और हवन करने का लाभ रमणलाल जैन को प्राप्त हुआ ।

शाम को शांतिनाथ भगवान की और अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज की आरती की गई।
इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान की आराधना करने से जीवन में पुण्य की प्राप्ति होती है पर भगवान की आराधना हमें निस्वार्थ करना चाहिए तभी हम कर्मों की निर्जरा कर सकते हैं। स्वार्थ के साथ की गई भगवान की आराधना पुण्य का संचय नहीं करवाती है। मुनि श्री ने कहा कि आज आप सबने जिस भक्ति भाव से भगवान की आराधना की है वह आपके जीवन में निश्चित ही सुख शांति लेकर आएगी। आज शनि अमावस्या के अवसर पर भगवान मुनिसुव्रतनाथ की आराधना के साथ जो आपने पुण्य का बंध किया है वह आपके विघ्नों को दूर करेगा। वैसे भी शनि अमावस्या का अपना महत्व होता है और आप सब ने उस महत्व को समझते हुए आज जो आराधना की है वास्तव में आपके जीवन में सुख शांति समृद्धि लेकर आएगी।

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