दिल की बात:- ‘संतों के विहार से जुड़ी समस्याओं पर समाज करे विचार’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

label_importantअंतर्मुखी के दिल की बात

कुछ महीनों पहले अंतर्मुखी दिल की बात में साधुओं के आहार-विहार के बारे में लिखा गया था। आज मुझे एक बात पढ़ने को मिली, जिसमें लिखा था कि “संतो का विहार अब होगा बिल्कुल आसान“। यह पोस्ट श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के अधीन कार्यरत मुनि सेवा समिति ने डाली थी। साधु-संतों का विहार कैसे आसान होगा, क्या किया जाएगा इस बात की चर्चा समिति द्वारा 22 दिसम्बर 2020 को दोपहर 2 बजे की जाएगी।
चर्चा में क्या होगा यह तो पता नहीं पर यह एक सहरानीय कदम है। 2016 में णमो लोए सव्वसाहूणं परिवार में भी साधुओं के आहार, विहार और निहार को सुव्यवस्थित करने का संकल्प किया गया था। उसके तहत काम भी हुआ है। अगर दोनो संस्थान मिलकर काम करें तो लक्ष्य और भी जल्दी पूरा और व्यवस्थित हो सकेगा तथा सेवा करने वाली टीम भी बड़ी हो जाएगी।
साधुओं के आहार-विहार और निहार में कुछ परेशानियां हमेशा सामने आती हैं। जैसे साधुओं को लम्बा विहार करना पड़ता है ऐसे में चैके की व्यवस्था, गाड़ी की व्यवस्था, काम करने वाले और साथ में पैदल चलने वालों की व्यवस्था नही हो पाती है। साधु को संघ में गाड़ी, सहायक और और चैके की व्यवस्था करनी होती है। इसके चलते साधु को नही चाहते हुए भी इनकी व्यवस्था के लिए बार-बार समाज या भक्तों को कहना पड़ता है, जो व्यवहार के दृष्टि से उचित नही है।
कौन सा साधु का कहां विहार कर रहा है उसकी जानकारी एक जगह नहीं मिल पाती। साधुओं के प्रवचन, कक्षाएं, धर्मप्रभावना के अन्य कार्य आदि का प्रचार प्रसार सोशल मीडिया पर एक ही जगह से होना चाहिए। इससे लोगों तक सकारात्मक सामग्री तो पहुंचेगी ही साथ ही एक जगह ही सब साधुओं के बारे में जानकारी भी मिल सकेगी।
सरकार, शासन, प्रशासन से बात कर बड़े शहरों, गांव आदि में निहार के स्थान सुरक्षित करवाने चाहिए। एक गांव से दूसरे गांव की एक ऐसी श्रृंखला बनाई जानी चाहिए कि किसी भी रास्ते से किसी राज्य में साधु का विहार हो तो एक दूसरे का सहयोग मिलता रहे। इसमें किसी तरह की गुटबाजी या संतवाद ना हो। निग्र्रन्थ साधु का विहार निर्विघ्न होना चाहिए।
22 तारीख को जो कुछ भी तय किया जा रहा है उसमें इन परेशानियों पर विचार जरूर होना चाहिए।

अनंत सागर
अंतर्मुखी के दिल की बात
(अडतीसवां भाग)
21 दिसम्बर, 2020, सोमवार, बांसवाड़ा

अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
(शिष्य : आचार्य श्री अनुभव सागर जी)

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