श्रावक : स्वयं को शुद्ध कर जाप करें  – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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कर्म निर्जरा और आत्मशांति के लिए श्रावक जाप करते हैं। जाप करने से पहले हाथ और शरीर के अंगों की शुद्धि करनी चाहिए। इसे सकलीकरण भी कहते हैं। यशस्तिलकचम्पूगत (श्रावकाचार भाग 1) में इसका वर्णन आया है, तो आओ जानते हैं क्या है सकलीकरण-

दोनो हाथों को अंगूठे से लेकर कनिष्ठा अंगुली तक शुद्ध करें (सकलीकरण)। उसके बाद हृदय, मुख, मस्तक आदि का सकलीकरण करना चाहिए।

• ऊँ ह्रां णमो अरहंताणं अंगुष्ठाभ्यां नमः (दोनो अंगूठों को पानी में डुबोकर शुद्ध करें)
• ऊँ ह्रीं णमो सिद्धाणं ह्रीं तर्जनीयभ्यां नमः (दोनो तर्जनी को पानी में डुबोकर शुद्ध करें)
• ऊँ ह्रूं णमो आयरियाणं ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः (दोनो मध्यमा को पानी में डुबोकर शुद्ध करें)
• ऊँ ह्रौं णमो उवज्झायाणं ह्रौं अनामिकाभ्यां नमः (दोनो अनामिका को पानी में डुबोकर शुद्ध करें)
• ऊँ ह्रः णमो लोए सव्वसाहूणं ह्रः कनिष्ठाभ्यां नमः (दोनो कनिष्ठा को पानी में डुबोकर शुद्ध करें)
• ऊँ ह्रीं ह्रूं ह्रौं ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः (दोनो हथेलियों को दोनो और से शुद्ध करें)
• ऊँ ह्रां णमो अरहंताणं ह्रां मम शीर्ष रक्ष रक्ष स्वाहा (मस्तक पर पुष्प डालें)
• ऊँ ह्रीं णमो सिद्धाणं ह्रीं मम वदनं रक्ष रक्ष स्वाहा (मस्तक पर पुष्प डालें)
• ऊँ ह्रूं णमो आयरियाणं ह्रूं ह्रदयं रक्ष रक्ष स्वाहा (हृदयपर पुष्प डालें)
• ऊँ ह्रौं णमो उवज्झायाणं ह्रौं मम नाभि रक्ष रक्ष स्वाहा (नाभि पर पुष्प डालें)
• ऊँ ह्रः णमो लोए सव्वसाहूणं ह्रः मम पादौ रक्ष रक्ष स्वाहा (पैरों पर पुष्प डालें)

अनंत सागर
श्रावक
अड़तालीसवां भाग
31 मार्च 2021, बुधवार, भीलूड़ा (राजस्थान)

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