उत्सव/रात्रि भोजन से तत्काल नष्ट हो जाते हैं संचित पुण्य -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

label_importantसमाचार

उदयपुर। हमारी संस्कृति क्या है, हमारे लिए यह जानना सबसे ज्यादा जरूरी है, हम उसका निर्वाह कर पाएं या न कर पाएं, यह अलग विषय है। यह बात अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने अशोक नगर स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित संस्कृति उत्सव-2 के दौरान कही। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में रात्रि भोजन का निषेध किया गया है। महाभारत में नरक के चार द्वार बताए गए हैं, जिनमें से प्रथम द्वार रात्रि भोजन को माना गया है। श्रीफल फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में मुनि पूज्य सागर ने कहा  कि रात्रि भोजन से संचित पुण्य तत्काल नष्ट हो जाते हैं।इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत में सबसे पहले भगवान का पंचामृत अभिषेक और भक्तामर विधान हुआ। इसके बाद अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के गृहस्थ अवस्था के माता-पिता मध्यप्रदेश के खरगोन जिला के पिपलगोन निवासी श्रीमती विमला देवी जैन और श्री सोमचंद जैन का सम्मान राजेश शाह,रोशन चित्तौड़ा,अजित मानावत ने  किया । इसके अलावा मुनि श्री के उदयपुर में चातुर्मास में सहयोग देने के लिए मधु चित्तौड़ा-मनोहर चित्तौड़ा, रोशन चित्तौड़ा और जयमाला चित्तौड़ा-प्रदीप चित्तौड़ा को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर धर्म मंजूषा का विमोचन किया गया।कार्यक्रम में  योगेश जैन,अनिता जी , शैलेन्द्र जैन, महावीर सारगिया,मधु जैन,प्रदीप चित्तौड़ा ,अजित जैन ऊन ,पवन मेहता,प्रकाश चित्तौड़ा चन्द्र प्रकश बैद( किशनगढ़) ,अनिल सेठी (किशनगढ़) आदि उपस्थित थे ।

Related Posts

Menu