श्रावक : व्यसनों से मिलने वाले दुःख का वर्णन नहीं किया जा सकता – अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी

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vyanjno se milne wale dukh ka varnan nahi kiya ja skta

एक व्यसन के प्रभाव से भी मनुष्य अनेक दु:ख भोगता है तो फिर जो सातों व्यसन करता है उसे जो दु:ख मिलते होंगे उनका वर्णन शब्दों से नही किया जा सकता है। वसुनन्दी श्रावकाचार में सात व्यसनों से दुःखी श्रावकों के नाम आए हैं जो इस प्रकार हैं-

• जुआ खेलने से युधिष्ठिर को बारह वर्ष वनवास जाना पड़ा और अपमान हुआ।
• प्यास के कारण यादवों ने पुरानी शराब को जल समझकर पिया तो वो भी जलकर नष्ट हो गए।
• एकचक्र नामक नगर में मांस खाने से गृद्धबक राक्षस राज्यपद से भ्रष्ट हुआ और अपयश से मरकर नरक में गया।
• निपुण बुद्धि चारुदत्त वेश्या की संगति से धन खोकर दुःखी हुआ और उसे राज्य छोड़कर अन्य देश को जाना पड़ा।
• पूरे भरत क्षेत्र पर राज्य करने वाला चक्रवर्ती ब्रह्मदत्त शिकार करने के कारण नरक में गया।
• धरोहर का अपहरण करने के कारण श्रीभूति आर्तध्यान के प्रभाव से मरकर दीर्घकाल तक संसार भ्रमण करता रहा।
• रावण स्त्री के हरण के कारण अपने सब वैभव से दूर हुआ, अपमानित हुआ और मरकर नरक गया।

अनंतसागर
श्रावक
तेतालीसवां भाग
24 फरवरी 2021, बुधवार, बांसवाड़ा

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