जो हो उसे कर्मफल समझें और साम्य भाव रखें – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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चार महीने से स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है। ज्योतिष और देवत्व शक्ति के भी संकेत थे कि स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा। इस बीच 45 दिन का मौन भी रहा। स्वास्थ्य का बिगड़ना और सुधरना यह सब कर्मों का ही खेल है। आने कर्मों का पता चाहे ज्योतिष से, देवत्व शक्ति से या गुरु कृपा से जो भी पता चल यह सब निमित्त है। इनको जन्म हमने ही दिया है। पता चलने पर अशुभ कर्म को नष्ट करने के लिए धर्म की आराधना, ध्यान, जाप आदि साधन हैं। जो मैंने किए भी। इन चार महीनों में कई अनुभव भी हुए। आत्मशक्ति और चिंतन शक्ति भी बढ़ी।
यह मैं अपनी ही बात कर रहा हूं। यह मेरे अपने कर्मों की ही बात है। दूसरों के कर्मों की बहुत बात कर ली सोचा आज अपने ही कर्मों की बात कर लूं। उदयपुर से ही कर्मों का खेल चल रहा था। चातुर्मास जहां-जहां करना चाह रहा था, वहां विभिन्न कारणों से व्यवस्था बैठी नहीं। फिर लोहारिया के विहार और आचार्य श्री अनुभव सागर जी के साथ चातुर्मास का पक्का किया। सबने कहा फोन कर देते हैं, हमने कहा घर जा रहे हैं फोन करने की आवश्यकता नहीं है।
कुछ ने यह भी पूछा कि आचार्य श्री अनुभव सागर महाराज के साथ क्यों नही करना चाहते थे तो मैं बता दूं कि मेरा ज्योतिष और देवत्व शक्ति मुझे आचार्य श्री के साथ चतुर्मास करने का संकेत नहीं दे रही थी। संकेत थे कि स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा और मैं नहीं चाहता था कि मेरे कारण संघ को कोई परेशानी हो। वही हुआ चार माह से स्वास्थ्य खराब ही होता रहा। अंत में समापन के पांच दिन पहले विहार कर बांसवाड़ा आना ही पड़ा। पहाड़ा समाज में कुछ व्यक्ति संपर्क में थे। कोरोना को लेकर फेसबुक के कुछ लाइव इस बात का प्रमाण हैं कि मेरी ज्योतिष और देवत्व शक्ति कितनी सही है।
लोहारिया चातुर्मास में 5 महीने में 3 महीना उल्टी, 1 महीना हाथ फैक्चर, 15 दिन तेज बुखार रहा, इससे आप समझ जाओ की ज्योतिष और देवत्व शक्ति का संकेत क्या था। फिर भी मेरे अपने कर्मों का खेल था कि मालूम होते हुए भी वहीं चातुर्मास करना पड़ा जहां बीमार रहने के संकेत थे। इन सब घटनाओं को आपको बताने का मतलब सिर्फ इतना है कि इसमें किसी का दोष नहीं था। यह सब मेरे अपने कर्मों का फल है। इस दौरान जो भी अनुभव हुए, जिसकी वजह से भी हुए उनके प्रति वही भाव है जो पहले से था। इसे ही कर्म का खेल कहते है। जीवन की हर घटना को कर्मो का फल समझ कर सब से साम्य भाव रखें।

कर्म सिद्धांत
(अट्ठाईसवां भाग)
10 नवम्बर, 2020, मंगलवार, लोहारिया
अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
(शिष्य : आचार्य श्री अनुभव सागर जी

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