अंतर्भाव

अंतर्भाव:- ‘ये चार भाव देंगे मानसिक और आत्मिक शांति’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

  मनुष्य आत्मिक शांति चाहता है। इसके लिए मन का शान्त होना अत्यंत आवश्यक है। मन की शांति के लिए…

अंतर्भाव:-दृष्टि बदलो, पूरी दुनिया तुम्हारी मित्र हो जाएगी- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

संसार सुख -दुःख का मेला है। प्राणी को इस संसार रूपी मेले में सुख और दुख दोनों के साधन मिलते…

अंतर्भाव:रावण… लेकिन मेरा पछतावा मेरी अच्छाई का प्रमाण!- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

मैनें सीता का हरण तो किया पर उसका भोग नहीं किया, क्योंकि वह मुझे नहीं चाहती थी। वह मेरे अपने…

विश्वास- एक मज़बूत नींव- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

दुनिया में जितने व्यक्ति है उनके अंदर विश्वास, आत्मविश्वास और अंधविश्वास ने हर व्यक्तित्व सामर्थ्यानुसार जगह बना रखी है। मानव…
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